क्या ग़ैर-मुस्लिम पर इस्लाम स्वीकार करना अनिवार्य है?
इलाज के लिए खाने-पीने के बरतनों पर क़ुर्आन की कुछ आयतें, उदाहरण के तौर पर आयतुल कुरसी लिखने का हुक्म क्या है?
क्या जिन्नात ग़ैब की बातें जानते हैं? - (हिन्दी)
क्या जिन्नात ग़ैब की बातें जानते हैं?
पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की प्रशंसा को तिजारत बना लेने का हुक्म क्या है?
इस देश में बहुत से मुस्लिम छात्रों को पढ़ाई और रहन सहन के खर्च को कवर करने के लिए काम करना पड़ता है, क्योंकि उनमें से बहुत से पर्याप्त रूप से अपने परिवार से खर्च नहीं पाते हैं, जिसके कारण उनके लिए काम करना एक जरूरत बन जाता है जिसके....
रोज़े का हुक्म - (हिन्दी)
इस लेख में क़ुरआन, हदीस और मुसलमानों की सर्वसम्मति के द्वारा रोज़े का हुक्म, तथा किन लोगों पर रोज़ा अनिवार्य है और इस फ़रीज़ा का इनकार करने वाले का हुक्म उल्लेख किया गया है।
मुस्लिम समुदाय की एकता को सुनिश्चित करने हेतु सभी मताले को मक्का के मताले से संबंधति करना - (हिन्दी)
कुछ लोग रमज़ान के महीने के प्रवेश करने (प्रारम्भ होने) इत्यादि में उम्मत की एकता और अखण्डता को सुनिश्चित करने के लिए इस बात का मुतालबा करते हैं कि समस्त मताले (चाँद के उगने के स्थान) को मक्का के मताले से संबंधित कर दिया जाए, इस विषय में आपका क्या....
रोज़ा की हिक्मतें और उसके फायदे - (हिन्दी)
रोज़ा –व्रत-जिसे अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अनिवार्य किया है, उसके अंदर बहुत बड़ी तत्वदर्शिता और ढेर सारे फायदे और लाभ हैं, जिन से एक रोज़ा रखने वाला लाभान्वित होता है। इस लेख में इसी का उल्लेख किया गया है।
बीमार और मुसाफिर के रोज़े का हुक्म - (हिन्दी)
इस्लाम के गुणों में से एक महान गुण यह भी है कि उसने लोगों की आवश्यकताओं और उनकी परिस्थितियों का बहुत ध्यान रखा है और जहाँ भी उन्हें कठिनाई और कष्ट का सामना होता है, वहाँ उनके लिए आसानी का नियम और संविधान पस्तुत करता है, उन्हीं में से एक....
तरावीह की नमाज़ का हुक्म - (हिन्दी)
इस लेख मे तरावीह की नमाज़ का हुक्म, उसकी फज़ीलत, उसकी रक्अतों की संख्या और उसकी अदायगी का मस्नून तरीक़ा उल्लेख किया गया है।
ज़कात के अहकाम - (हिन्दी)
ज़कात इस्लाम के कर्तव्यों में से एक महान कर्तव्य और उसका तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसे अल्लाह तआला अपनी किताब में अनिवार्य किया है और अल्लाह के पैग़ंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने स्वयं ज़कात वसूल किया है और जिस पर ज़कात अनिवार्य है उस से वसूल करने का आदेश....
इस्लाम में आर्थिक स्थिति की एक झलक - (हिन्दी)
धन जीवन की रीढ़ की हड्डी और उसका आधार है, जिसके द्वारा इस्लामी शरीअत का उद्देश्य एक संतुलित समाज की स्थापना है जिस में सामाजिक न्याय का बोल बाला हो जो अपना तभी सदस्यों के लिए आदरणीय जीवन का प्रबंध करता है। और जब इस्लाम की दृष्टि में धन उन....

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