क्या मस्जिद के अंदर चौकीदार का कमरा और ज़कात समिति का कमरा उसके अंदर एतिकाफ करने के लिए उचित है ? जबकि ज्ञात रहे कि इन कमरों के दरवाज़े मस्जिद के भीतर हैं।
रोज़े के महत्वपूर्ण अहकाम व मसाईल - (हिन्दी)
यह एक संछिप्त महत्वपूर्ण लेख है जिस में रोज़े के हुक्म, रोज़े के विषय में लोगों के विभिन्न वर्ग, रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों तथा रोज़े संबंधित कुछ लाभदायक बातों का उल्लेख किया हया है।
यदि किसी महिला पर रमज़ान के रोज़ों का क़र्ज़ है तो क्या उसके लिए जाइज़ है कि वह शव्वाल के छ: रोज़ों को क़र्ज़ से पहले रखे या कि क़र्ज़ को शव्वाल के छ: रोज़ों पर प्राथमिकता दे ?
ज़कातुल फित्र का हुक्म - (हिन्दी)
क्या यह हदीस सहीह है कि "रमज़ान का रोज़ा उठाया नहीं जाता यहाँ तक कि ज़कातुल फित्र अदा कर दिया जाये" ? और यदि मुसलमान रोज़ेदार ज़रूरतमंद है, ज़कात के निसाब का मालिक नहीं है तो क्या उक्त हदीस के सहीह होने के कारण या उसके अलावा अन्य सुन्नत से....
ज़कातुल फित्र की मात्रा - (हिन्दी)
ज़कातुल फित्र की मात्रा क्या है ? और वह कब निकाली जायेगी? तथा वह किस को दी जायेगी ? और क्या उसे मस्जिद के इमाम की तरफ से एकत्रित करना फिर उसे उसके हक़दारों पर वितरित करना चाहे कुछ समय के बाद ही क्यों न हो, जाइज़ है ? और....
ज़कातुल फित्र निकालने का समय - (हिन्दी)
क्या ज़कातुल फित्र निकालने का समय ईद की नमाज़ के बाद से उस दिन के अंत तक है ?
ज़कातुल फित्र को उसके समय से विलंब करना - (हिन्दी)
मैं एक यात्रा में था और ज़कातुल फित्र देना भूल गया, यात्रा सत्ताईसवीं रमज़ान की रात को थी और हम ने अभी तक ज़कातुल फित्र नहीं निकाली है।
उस आदमी का क्या हुक्म है जिसके पास ज़कातुल फित्र निकालने का सामर्थ्य (ताक़त) है फिर भी वह ज़कात न निकाले ?
स्त्री का बिना महरम के हज्ज करना - (हिन्दी)
यदि स्त्री बिना महरम के हज्ज करती है तो क्या उसका हज्ज उचित है? क्या समझदार बच्चा महरम बन सकता है? महरम की क्या शर्तें हैं?
नमाज़ न पढ़ने वाले का हज्ज - (हिन्दी)
जो व्यक्ति नमाज़-रोज़ा नहीं करता है और इसी अवस्था में हज्ज करता है, तो उसके हज्ज का क्या हुक्म है? यदि वह अल्लाह से तौबा कर ले तो क्या वह छूटी हुई इबादतों की क़ज़ा करेगा?
यात्री यदि रोज़े की अवस्था में मक्का पहुँचे तो क्या वह उम्रा करने के लिए शक्ति जुटाने हेतु रोज़ा तोड़ देगा?
इस्लाम और मानव-समाज - (हिन्दी)
इस्लाम और मानव समाजः इस्लाम जहाँ एक तरफ मानव की उत्पत्ति की वास्तविकता, इस संसार में उसके उद्देश्य, अपने पालनहार के प्रति उसके कर्तव्यों को स्पष्ट करता है, वहीं दूसरी ओर उस समाज के प्रति भी मार्गदर्शन करता है जिसमें मनुष्य जीवन यापन करता है। इस्लाम उसे शांतिपूर्ण और सौभाग्यपूर्ण....

API



