किसी चीज़ को मनहूस –अशुभ- समझना या उस से अपशकुन और बदफाली लेना जाहिलियत –अज्ञानता- के युज्ञ की परंपराओं में से है, जिसका इस्लाम ने खण्डन किया है और उसे अल्लाह पर दृढ़ विश्वास,संपूर्ण तवक्कुल व भरोसा के विरुद्ध घोषित किया है। जाहिलियत के समय के अरब जिन चीज़ों से....
क्या सफ़र का महीना अशुभ है? - (हिन्दी)
रोज़ा की हिक्मतें और उसके फायदे - (हिन्दी)
रोज़ा –व्रत-जिसे अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अनिवार्य किया है, उसके अंदर बहुत बड़ी तत्वदर्शिता और ढेर सारे फायदे और लाभ हैं, जिन से एक रोज़ा रखने वाला लाभान्वित होता है। इस लेख में इसी का उल्लेख किया गया है।
मेरे पिता ने अपने जीवन में मुझे यह वसीयत की थी कि मैं अपनी यथा शक्ति प्रति वर्ष पंद्रह शाबान की रात को खैरात किया करूँ। और वास्तव में, अभी तक मैं ऐसा करता रहा हूँ। किन्तु कुछ लोगों ने इस पर मेरी निंदा करते हुए कहा कि ऐसा करना....
हमारे यहाँ पंद्रह शाबान की रात को लोग मस्जिदों में एकत्र होते हैं और तीन बार सूरत यासीन पढ़ते हैं और मौलिद पढ़ते हैं।
पंद्रह शाबान की फज़ीलत में क्या वर्णित है - (हिन्दी)
कुछ विद्वानों का कहना है कि पंद्रह शाबान और उस के रोज़े की फज़ीलत और पंद्रहवीं शाबान की रात को इबादत में गुज़ारने के बारे में हदीसें वर्णित हैं। क्या ये हदीसें शुद्ध और प्रमाणित हैं, या सहीह नहीं हैं ? यदि कोई हदीस सही है तो हमें स्पष्ट जानकारी....
यह बात किसी पर रहस्य नहीं कि जिस व्यक्ति ने रमज़ान के दिन में अपनी पत्नी से संभोग कर लिया उस पर एक गुलाम आज़ाद करना, या लगातार दो महीने रोज़े रखना, या साठ मिस्कीनों को खाना खिलाना अनिवार्य है। प्रश्न यह है किः 1- अगर आदमी अपनी पत्नी से....
रमज़ान की क़ज़ा को किसी कारण के आधार पर विलंब करने के बीच और उसे अकारण विलंब करने के बीच अंतर - (हिन्दी)
उस आदमी के बारे में इस्लामी शरीयत का क्या हुक्म है जिसने रमज़ान के छूटे हुए रोज़ों की क़ज़ा को किसी कारणवश दूसरे रमज़ान के बाद तक विलंब कर दिया तथा एक दूसरे आदमी ने उसे बिना किसी कारण के विलंब कर दिया ?
उस व्यक्ति का क्या हुक्म है जिसने रमज़ान के रोज़े की क़ज़ा को छोड़ दिया जबकि उसके पास कोई उज़्र (बहाना, कारण) नहीं है, क्या उसके लिए क़ज़ा करने के साथ केवल तौबा कर लेने काफी है, या उस पर कफ्फारा अनिवार्य है ?
मैं ने एक साल मासिक धर्म (माहवारी) के दिनों में रोज़ा तोड़ दिया और अभी तक उन दिनों का रोज़ा नहीं रख सकी हूँ। इस पर कई वर्ष बीत चुके हैं। मेरे ऊपर रोज़ों की जो क़र्ज़ है मैं उसका भुगतान करना चाहती हूँ। लेकिन मुझे यह ज्ञात नहीं कि....
क्या रमज़ान में रोज़े और नमाज़ की पाबंदी करने और उसके बाद ही नमाज़ छोड़ देने वाले का रोज़ा मान्य है - (हिन्दी)
यदि मनुष्य रमज़ान के महीने का रोज़ा रखने और रमज़ान में नमाज़ पढ़ने का बहुत लालायित है, किन्तु रमज़ान समाप्त होते ही नमाज़ छोड़ देता है, तो क्या उसका रोज़ा शुद्ध (मान्य) है ?
बिना किसी कारण के रमज़ान में रोज़ा तोड़ देना - (हिन्दी)
एक महिला ने बिना किसी उज़्र (कारण) के सन् 1396 हिज्री में रमज़ान के तीन दिनों का रोज़ा तोड़ दिया, बल्कि उसने लापरवाही करते हुए ऐसा किया, तो इस बारे में अल्लाह का हुक्म (फैसला) क्या है और उस पर क्या अनिवार्य है ?
उस आदमी का क्या हुक्म है जिसने रमज़ान के दिन में रोज़े की हालत में अपनी पत्नी से कई बार संभोग कर लिया, फिर उसने बाद में सुना कि रोज़े की हालत में संभोग करना जाइज़ नहीं है ?

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