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ईद की नमाज़ का हुक्म और उसका तरीक़ा - (हिन्दी)

यह आदरणीय शैख मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन रहिमहुल्लाह से पूछे गये एक प्रश्न का उत्तर है जिसका अंश यह है किः ईद की नमाज़ का हुक्म और उसका तरीक़ा क्या है ? और उसकी शर्तें और उसका समय क्या है ?

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ईद की नमाज़ का हुक्म - (हिन्दी)

ईद की नमाज़ का हुक्म

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रमज़ान के बाद आज्ञाकारिता पर कैसे स्थिर रहें ? - (हिन्दी)

अक्सर देखा जाता है कि बहुत से वे मुसलमान जो रमज़ान के महीने में बहुत सारी नेकियों की पाबंदी करते थे, इस महीने की समाप्ति के बाद वे इन नेकियों को छोड़ देते हैं, उन पर स्थिर नहीं रहते हैं। जबकि अल्लाह तआला ने अपनी किताब में हमें मृत्यु आने....

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नीयतों को एकत्रित करने का मुद्दा - (हिन्दी)

प्रस्तुत लेख एक महत्वपूर्ण मुद्दे के वर्णन पर आधारित है जिसके बारे में, विशेषकर शव्वाल के महीने में, अधिक प्रश्न किया जाता है, और यह मुद्दा ’’एक ही कार्य में कई नीयतों को एकत्रित करना’’ है।

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ज़ुलहिज्ज़ा के दस दिनों की फजी़लत और उस के अहकाम - (हिन्दी)

अल्लाह तआला की महान कृपा और उपकार है कि उसने अपने बन्दों के लिए ऐसे नेकियों के मौसम और अवसर निर्धारित किये हैं जिन में वे अधिक से अधिक नेक कार्य करके अपने पालनहार की निकटता प्राप्त करने की चेष्टा करते हैं। उन्हीं महान मौसमों और महत्वपूर्ण अवसरों में से....

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मृतकों की ओर से क़ुर्बानी करने का हुक्म - (हिन्दी)

यह आदरणीय शैख मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन रहिमहुल्लाह की पत्रिका ‘‘अहकामुल उज़हियाति वज़्ज़कात’’ का एक अध्याय है, जिसके अंदर क़ुर्बानी के विषय में बुनियादी उसूल का उल्लेख किया गया है और वह यह है कि क़ुर्बानी ज़िन्दा लोगों की तरफ से धर्मसंगत है। लेकिन इस समय बहुत से लोग ज़िन्दों....

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नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर से क़ुर्बानी का हुक्म - (हिन्दी)

क्या मुसलमान का नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर से क़ुर्बानी करना सही है ? इस मुद्दे में विद्वानों का विचार क्या है ? इस हदीस की प्रामाणिकता क्या है और उसकी व्याख्या क्या है ? हनश से वर्णित है वह अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत करते हैं कि....

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अल्लाह के महीने मुहर्रम के फज़ाइल और उसके अहकाम - (हिन्दी)

अल्लाह तआला की अपने बन्दों पर असंख्य नेमतों में से एक यह है कि वह उन्हें नेकियों के मौसम प्रदान करता रहता है ताकि उन्हें भरपूर बदला दे और अपनी अनुकम्पा से उन्हें अधिक प्रदान करे। अभी हज्ज का शुभ मौसम समाप्त ही हुआ था कि उसके बाद एक महान....

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सफ़र के महीने से अपशकुन लेना जाहिलियत के कामों में से है - (हिन्दी)

अक्सर दोहराया जाता रहता है कि सफर का महीना नहूसत (अपशगुन, दुर्भाग्य) का महीना है, जिससे कुछ अवाम बहुत से मामलों में अपशकुन लेते हैं। चुनाँचे उदाहरण के तौर पर इस महीने में निकाह नहीं किया जाता है, इसी तरह कुछ लोगों का मानना है कि निकाह की सभा में....

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सफ़र के महीने में शादी या खतना आदि न करना एक प्रकार का अपशकुन है - (हिन्दी)

हमने सुना है कि ऐसी मान्यताएं पाई जाती हैं जिसका आशय यह है कि सफर के महीने में शादी, खतना और इसके समान अन्य चीज़ें करना जायज़ नहीं है। कृपया हमें इस बारे में इस्लामी क़ानून के अनुसार अवगत कराएं। अल्लाह आप की रक्षा करे।

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सफर के महीने के अंतिम बुद्धवार की नफ़्ल नमाज़ का हुक्म - (हिन्दी)

हमारे देश में कुछ विद्वानों का भ्रम यह है कि इस्लाम धर्म में एक नफल नमाज़ है जो सफर महीने के अंत में बुध के दिन चाश्त के समय एक सलाम के साथ चार रकअत पढ़ी जाती है जिसमें हर रकअत के अंदर सूरतुल फातिहा, सत्तरह बार सूरतुल कौसर, पचास....

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नए साल का जश्न - (हिन्दी)

बहुत से मुसलमान जानते हुए या अनजाने में गैर-मुस्लिमों के अनेक त्योहारों और धार्मिक पर्वों में भाग लेते हैं, जिनमें से एक नए साल का जश्ना मनाना भी है। इस अवसर पर वे एक दूसरे को नए वर्ष की बधाई देते हैं, बधाई कार्ड तथा उपहार भेंट करते हैं। प्रस्तुत....