उस आदमी का क्या हुक्म है जो ला इलाहा इल्लल्लाह की गवाही देता है, नमाज़ क़ायम करता है, परंतु ज़कात नहीं देता है और वह इससे कभी सहमत नहीं होता है ? यदि वह मर जाता है तो उसका क्या हुक्म है, क्या उसकी नमाज़ जनाज़ा पढ़ी जायेगी या नहीं....
ज़कात क हुक्म - (हिन्दी)
ज़कात - (हिन्दी)
"ज़कात" इस्लाम के पाँच मूल स्तंभों में से एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका इस्लाम में एक महान स्थान है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन करीम में 32 स्थानों पर इसका वर्णना किया है जिनमें से 27 स्थानों पर उसे नमाज़ के साथ उल्लेख किया है। तथा ज़कात की उपेक्षा करने वाले....
ज़कातुल-फित्र के अहकाम - (हिन्दी)
ज़कातुल-फित्र के अहकामः रमज़ान के महीने की समाप्ति अल्लाह के पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुसलमानों पर ज़कातुल-फित्र निकालना अनिवार्य किया है। इस लेख में ज़कातुल-फित्र के अहकाम संछिप्त रूप में वर्णन किए गए हैं।
रोज़ा की हिक्मतें और उसके फायदे - (हिन्दी)
रोज़ा –व्रत-जिसे अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अनिवार्य किया है, उसके अंदर बहुत बड़ी तत्वदर्शिता और ढेर सारे फायदे और लाभ हैं, जिन से एक रोज़ा रखने वाला लाभान्वित होता है। इस लेख में इसी का उल्लेख किया गया है।
बीमार और मुसाफिर के रोज़े का हुक्म - (हिन्दी)
इस्लाम के गुणों में से एक महान गुण यह भी है कि उसने लोगों की आवश्यकताओं और उनकी परिस्थितियों का बहुत ध्यान रखा है और जहाँ भी उन्हें कठिनाई और कष्ट का सामना होता है, वहाँ उनके लिए आसानी का नियम और संविधान पस्तुत करता है, उन्हीं में से एक....
तरावीह की नमाज़ का हुक्म - (हिन्दी)
इस लेख मे तरावीह की नमाज़ का हुक्म, उसकी फज़ीलत, उसकी रक्अतों की संख्या और उसकी अदायगी का मस्नून तरीक़ा उल्लेख किया गया है।
ज़कात के अहकाम - (हिन्दी)
ज़कात इस्लाम के कर्तव्यों में से एक महान कर्तव्य और उसका तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसे अल्लाह तआला अपनी किताब में अनिवार्य किया है और अल्लाह के पैग़ंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने स्वयं ज़कात वसूल किया है और जिस पर ज़कात अनिवार्य है उस से वसूल करने का आदेश....
मेरे पिता ने अपने जीवन में मुझे यह वसीयत की थी कि मैं अपनी यथा शक्ति प्रति वर्ष पंद्रह शाबान की रात को खैरात किया करूँ। और वास्तव में, अभी तक मैं ऐसा करता रहा हूँ। किन्तु कुछ लोगों ने इस पर मेरी निंदा करते हुए कहा कि ऐसा करना....
ज़कातुल फित्र का हुक्म - (हिन्दी)
क्या यह हदीस सहीह है कि "रमज़ान का रोज़ा उठाया नहीं जाता यहाँ तक कि ज़कातुल फित्र अदा कर दिया जाये" ? और यदि मुसलमान रोज़ेदार ज़रूरतमंद है, ज़कात के निसाब का मालिक नहीं है तो क्या उक्त हदीस के सहीह होने के कारण या उसके अलावा अन्य सुन्नत से....
ज़कातुल फित्र की मात्रा - (हिन्दी)
ज़कातुल फित्र की मात्रा क्या है ? और वह कब निकाली जायेगी? तथा वह किस को दी जायेगी ? और क्या उसे मस्जिद के इमाम की तरफ से एकत्रित करना फिर उसे उसके हक़दारों पर वितरित करना चाहे कुछ समय के बाद ही क्यों न हो, जाइज़ है ? और....
ज़कातुल फित्र निकालने का समय - (हिन्दी)
क्या ज़कातुल फित्र निकालने का समय ईद की नमाज़ के बाद से उस दिन के अंत तक है ?
ज़कातुल फित्र को उसके समय से विलंब करना - (हिन्दी)
मैं एक यात्रा में था और ज़कातुल फित्र देना भूल गया, यात्रा सत्ताईसवीं रमज़ान की रात को थी और हम ने अभी तक ज़कातुल फित्र नहीं निकाली है।

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