सुन्नत पर चलने का महत्व
सुन्नत पर चलने का महत्व - (हिन्दी)
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) सैयिदा खदीजह रज़ियल्लाहु अन्हा वह पहली महिला हैं जिनसे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने शादी की, उस समय उनकी आयु चालीस वर्ष थी, जबकि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पच्चीस वर्ष के थे। तथा वह आपके निकट सबसे प्रिय पत्नी थीं। इस लेख में....
उम्मुल-मोमिनीन सैयिदा सौदह रज़ियल्लाहु अन्हा - (हिन्दी)
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) सैयिदा सौदह बिन्त ज़मअह रज़ियल्लाहु अन्हा वह पहली महिला हैं जिनके साथ पैगंब रसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ख़दीजह रज़ियल्लाहु अन्हा के बाद विवाह किया, और उन्हीं के बारे में हिजाब (पर्दा) की आयत उतरी। इस लेख में उनकी संक्षेप जीवनी प्रस्तुत की गई है।
पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पति के रूप में : अल्लाह सर्वशक्तिमान ने अपने ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अपने संदेश के प्रसार के लिए चुनकर उन्हें सर्व मानवजाति के लिए उनके सभी मामलों में आदर्श बना दिया, और हमें सूचित कर दिया कि हमारे लिए पैगंबर....
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) सैयिदा जुवैरियह रज़ियल्लाहु अन्हा अपनी क़ौम के लिए सबसे अधिक बरकत वाली महिला थीं, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उनसे शादी कर लेने के कारण क़ौम - बनी मुस्तलिक़ - के सौ घर वाले आज़ाद कर दिए गए। इस लेख....
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) सैयिदा ज़ैनब बिन्त जहश रज़ियल्लाहु अन्हा उन महिलाओं में से हैं जिन्हों ने इस्लाम में प्रवेश करने में शीघ्रता की, वह अपने धर्म में पक्की और सच्ची थीं, उन्हों ने कुरैश की यातना और उत्पीड़न को सहन किया यहाँ तक कि अपने हिज्रत करने वाले....
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) सैयिदा हिन्द बिन्त सुहैल उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु अन्हा शिष्टाचार और समझबूझ (बुद्धि) में सबसे परिपूर्ण महिलाओं में से थीं, वह पहले पहल इस्लाम स्वीकार करनेवालों में से थीं, उनके पति अबू सलमा की मृत्यु के बाद पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे शादी की,....
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) सैयिदा रमलह बिन्त अबू सुफयान रज़ियल्लाहु अन्हा फसाहत (साफ सुथरी भाषा) वाली और शुद्ध विचार की मालिक महिला थीं। उनके पहले पति उबैदुल्लाह बिन जह्श की मौत के बाद पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे शादी की। इस लेख में उनकी संक्षेप जीवनी प्रस्तुत....
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) सैयिदा ज़ैनब बिन्त खुज़ैमा अल-हारिस रज़ियल्लाहु अन्हा को गरीबों और मिस्कीनों के साथ हमदर्दी व मेहरबानी करने के कारण “उम्मुल-मसाकीन” (अर्थात ग़रीबों की माँ) के नाम से याद किया जाता था, बद्र की लड़ाई में उनके पति के शहीद होने के बाद पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि....
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) उम्मुल-मोमिनीन सैयिदा हफ्सा बिन्त उमर बिन खत्ताब रज़ियल्लाहु अन्हुमा एक महान सहाबी खुनैस बिन हुज़ैफा अस-सहमी रज़ियल्लाहु अन्हु की पत्नी थीं, जो उहुद की लड़ाई में एक मार लगने के कारण अल्लाह को प्यारे हो गए थे। उसके बाद पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने....
सैयिदा मारिया अल-क़िब्तिय्यह रज़ियल्लाहु अन्हा उन दोनों लौंडियों में से एक थीं जिन्हें मिस्र में बीजान्टिन राज्य के एटॉर्नी जनरल और इस्कंदरिया के राज्यपाल मुकौकिस ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सेवा में भेंट की थी, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मारिया रज़ियल्लाहु अन्हा को अपने लिए चुन....
उम्मुल-मोमिनीन (अर्थात् विश्वासियों की माँ) उम्मुल-मोमिनीन सैयिदा आयशा बिन्त अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हुमा पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नियों में आपके निकट सबसे प्रिय और चहेती थीं, उम्महातुल मोमिनीन के बीच उनका महान स्थान था। वह क़ुरआन व हदीस और इस्लामी धर्मशास्त्र मे निपुण महिला थीं। इस लेख....

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