उस आदमी के बारे में इस्लामी शरीयत का क्या हुक्म है जिसने रमज़ान के छूटे हुए रोज़ों की क़ज़ा को किसी कारणवश दूसरे रमज़ान के बाद तक विलंब कर दिया तथा एक दूसरे आदमी ने उसे बिना किसी कारण के विलंब कर दिया ?
उस व्यक्ति का क्या हुक्म है जिसने रमज़ान के रोज़े की क़ज़ा को छोड़ दिया जबकि उसके पास कोई उज़्र (बहाना, कारण) नहीं है, क्या उसके लिए क़ज़ा करने के साथ केवल तौबा कर लेने काफी है, या उस पर कफ्फारा अनिवार्य है ?
मैं ने एक साल मासिक धर्म (माहवारी) के दिनों में रोज़ा तोड़ दिया और अभी तक उन दिनों का रोज़ा नहीं रख सकी हूँ। इस पर कई वर्ष बीत चुके हैं। मेरे ऊपर रोज़ों की जो क़र्ज़ है मैं उसका भुगतान करना चाहती हूँ। लेकिन मुझे यह ज्ञात नहीं कि....
क्या रमज़ान में रोज़े और नमाज़ की पाबंदी करने और उसके बाद ही नमाज़ छोड़ देने वाले का रोज़ा मान्य है - (हिन्दी)
यदि मनुष्य रमज़ान के महीने का रोज़ा रखने और रमज़ान में नमाज़ पढ़ने का बहुत लालायित है, किन्तु रमज़ान समाप्त होते ही नमाज़ छोड़ देता है, तो क्या उसका रोज़ा शुद्ध (मान्य) है ?
बिना किसी कारण के रमज़ान में रोज़ा तोड़ देना - (हिन्दी)
एक महिला ने बिना किसी उज़्र (कारण) के सन् 1396 हिज्री में रमज़ान के तीन दिनों का रोज़ा तोड़ दिया, बल्कि उसने लापरवाही करते हुए ऐसा किया, तो इस बारे में अल्लाह का हुक्म (फैसला) क्या है और उस पर क्या अनिवार्य है ?
उस आदमी का क्या हुक्म है जिसने रमज़ान के दिन में रोज़े की हालत में अपनी पत्नी से कई बार संभोग कर लिया, फिर उसने बाद में सुना कि रोज़े की हालत में संभोग करना जाइज़ नहीं है ?
कुछ लोग कहते हैं : यदि आप रमज़ान के दिन में किसी मुसलमान को खाते या पीते देखें तो आप पर उसको सूचित करना अनिवार्य नहीं है। क्योंकि उसे अल्लाह तआला ने खिलाया और पिलाया है। तो क्या यह बात सही है ?
लैलतुल क़द्र को किस तरह जागा जाये - (हिन्दी)
लैलतुल क़द्र (शबे क़द्र) को किस तरह जागा जाये; नमाज़ पढ़ने में, या क़ुर्आन करीम और सीरते नबवी का पाठ करने, वअज़ व नसीहत (धर्मोपदेश) और मस्जिद में उसका जश्न मनाने में ?
यदि किसी महिला पर रमज़ान के रोज़ों का क़र्ज़ है तो क्या उसके लिए जाइज़ है कि वह शव्वाल के छ: रोज़ों को क़र्ज़ से पहले रखे या कि क़र्ज़ को शव्वाल के छ: रोज़ों पर प्राथमिकता दे ?
शव्वाल के छः रोज़ों की शुरूआत कब की जायेगी ॽ - (हिन्दी)
क्या छः रोज़ों को रमज़ान के महीने के बाद ईद के दिन के तुरंत पश्चात ही रखना आवश्यक है या कि ईद के बाद शव्वाल के महीने में निरंतर कई दिनों के पश्चात रोज़ा रखना जाइज़ है, या नहीं ॽ
औरत के लिए ईद की नमाज़ सुन्नत है - (हिन्दी)
क्या औरत पर ईद की नमाज़ अनिवार्य है और यदि अनिवार्य है तो क्या वह उसे घर में पढ़ेगी या ईदगाह में
क़ुर्बानी की क़ीमत का सद्क़ा करना - (हिन्दी)
क़ुर्बानी के बारे में बातचीत हुई, कुछ लोगों का विचार यह था कि मृतक पर कु़र्बानी की वसीयत वैध नहीं है, क्योंकि सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु के बाद वसीयत नहीं की थी, इसी तरह खुलफाये राशेदीन ने भी इसकी वसीयत नहीं की।....

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