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ईद या इस्तिस्क़ा की नमाज़ में इमाम के साथ तशह्हुद पाने वाले व्यक्ति का हुक्म - (हिन्दी)

उस आदमी क्या हुक्म है जिसने ईदैन और इस्तिस्क़ा की नमाज़ में नमाज़ियों के साथ तशह्हुद को पाया, तो क्या वह दो रक्अत नमाज़ पढ़ेगा और उसी तरह करेगा जिस तरह इमाम ने किया है या क्या करेगा

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धन की ज़कात उसी के जिन्स से निकाली जायेगी - (हिन्दी)

क्या ज़कात को रूपये (नक़द), या गेहूँ, या चावल, या किसी भी अनाज की शक्ल में दिया जा सकता है ? क्या उसे नक़द मुद्रा के रूप में देना जायज़ है ? क्या उस धन में ज़कात अनिवार्य है जिसके द्वारा वह व्यापार करने की इच्छा रखता है, और अगर....

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नास्तिक को ज़कात देना - (हिन्दी)

क्या ज़कात के माल से या क़ुर्बानी के दिन क़ुर्बानी के गोश्त से अनेकेश्वरवादी नास्तिक पड़ोसी को, जिसके और आपके बीच कोर्इ रिश्तेदारी नहीं है, देना जायज़ है ?

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ज़कात निकालने का समय - (हिन्दी)

मुझे रजब के महीने में एक राशि प्राप्त हुर्इ, और मैं रमज़ान के महीने में उसकी ज़कात निकालना चाहता हूँ, तो क्या यह वैध है ? और इसका कारण यह है कि रमज़ान के महीने में ज़रूरतमंदों का पता चलता है।

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नक़द धन की ज़कात की गणना का तरीक़ा - (हिन्दी)

कुछ विद्वानों का कहना है कि जिन नक़दी धनों में ज़कात अनिवार्य है उन का निसाब (यानी ज़कात के अनिवार्य होने की न्यूनतम मात्रा) यह है कि वह 56 (छप्पन) सऊदी रियाल के बराबर हो जाए। किंतु कुछ दूसरे लोगों का कहना है कि यह निसाब एक ऐसे समय में....

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क़ुरआन करीम का पाठ सीखने की विधि - (हिन्दी)

मैं क़ुरआन करीम की अच्छी तरह तिलावत करने और उसे याद (कंठस्थ) करने पर सक्षम नहीं हूँ, तो अच्छी तरह क़ुर्आन तिलावत करने तथा उसे याद करने का तरीक़ा क्या है ? जबकि ज्ञात रहे कि हमें शिक्षा देने वाला और हमें पढ़ाने वाला कोई उपलब्ध नहीं है और हम....

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सफ़र के महीने में शादी या खतना आदि न करना एक प्रकार का अपशकुन है - (हिन्दी)

हमने सुना है कि ऐसी मान्यताएं पाई जाती हैं जिसका आशय यह है कि सफर के महीने में शादी, खतना और इसके समान अन्य चीज़ें करना जायज़ नहीं है। कृपया हमें इस बारे में इस्लामी क़ानून के अनुसार अवगत कराएं। अल्लाह आप की रक्षा करे।

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सफर के महीने के अंतिम बुद्धवार की नफ़्ल नमाज़ का हुक्म - (हिन्दी)

हमारे देश में कुछ विद्वानों का भ्रम यह है कि इस्लाम धर्म में एक नफल नमाज़ है जो सफर महीने के अंत में बुध के दिन चाश्त के समय एक सलाम के साथ चार रकअत पढ़ी जाती है जिसमें हर रकअत के अंदर सूरतुल फातिहा, सत्तरह बार सूरतुल कौसर, पचास....

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क्या ईद की नमाज़ में उपस्थित होनेवाले पर जुमा की नमाज़ अनिवार्य है? - (हिन्दी)

इस बारे में बहुत प्रश्न किया जाने लगा है कि यदि ईद का दिन जुमा के दिन पड़ जाए। चुनाँचे दो ईदें एक साथ हो जाएं: ईदुल फित्र या ईदुल अज़हा, जुमा की ईद के साथ एकत्रित हो जाए जो कि सप्ताह की ईद है, तो क्या ईद की नमाज़....

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एतिकाफ की शर्तें - (हिन्दी)

एतिकाफ की शर्तें क्या हैं और क्या रोज़ा उन्हीं में से है? और क्या एतिकाफ करने वाले के लिए किसी बीमार की ज़ियारत करना, या दावत स्वीकार करना, या अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा करना, या किसी जनाज़ा के पीछे जाना, या काम के लिए जाना जाइज़ है?