मैं इस वर्ष आशूरा (दसवें) मुहर्रम का रोज़ा रखना चाहता हूँ। मुझे कुछ लोगों ने बताया है कि सुन्नत का तरीक़ा यह है कि मैं आशूरा के साथ उसके पहले वाले दिन (नवें मुहर्रम) का भी रोज़ा रखूँ। तो क्या यह बात वर्णित है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम....
हज्ज के बाद कुछ वसीयतें - (हिन्दी)
प्रस्तुत लेख में हाजियों के लिए हज्ज के महान कर्तव्य की अदायगी के बाद कुछ वसीयतें प्रस्तुत की गई हैं जिनका पालन करना हाजी के लिए अति उचित है।
आशावाद - (हिन्दी)
अपशकुन लेना एक पुरानी प्रथा है जिसके विभिन्न समाजों में विभिन्न रंग व रूप पाए जाते हैं। इस्लाम धर्म की दृष्टि से यह एक घृणित प्रथा है जिसका इस्लाम ने खण्डन किया है और उसे निषिद्ध ठहराया है, तथा इस बात को स्पष्ट किया है कि उसका किसी चीज़ के....
सफ़र के महीने से अपशकुन लेना - (हिन्दी)
प्रस्तुत लेख में अपशकुन व निराशावाद का अर्थ स्पष्ट करते हुए यह उल्लेख किया गया है कि यदि मुसलमान के दिल में अपशकुन पैदा हो जाए तो उसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। तथा इस बात पर प्रकाश डाली गई है कि सफर के महीने से अपशकुन लेना जाहिलियत के....
उस आदमी क्या हुक्म है जिसने ईदैन और इस्तिस्क़ा की नमाज़ में नमाज़ियों के साथ तशह्हुद को पाया, तो क्या वह दो रक्अत नमाज़ पढ़ेगा और उसी तरह करेगा जिस तरह इमाम ने किया है या क्या करेगा
अब यह ज्ञात हो गया है कि ग्रहण एक सामान्य प्रक्रिया है जो एक ऐसी अवधि में होता है जिस में चाँद, सूरज और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। (जिस के घटित होने का समय पहले से जाना जा सकता है). तो फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम....
ईदगाह आने वाले के लिये क्या धर्म संगत है - (हिन्दी)
मैं ने देखा है कि कुछ लोग जब ईद की नमाज़ के लिए आते हैं तो दो रक्अत नमाज़ पढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग तक्बीर कहने में व्यस्त हो जाते हैं। आशा करता हूँ कि इन चीज़ों के बारे में शरीअत के हुक्म (नियम) को स्पष्ट करेंगे, और क्या ईद....
इस उम्मत पर अल्लाह सर्वशक्तिमान की यह अनुकम्पा और अनुग्रह है कि उसने इसे सबसे अंतिम और सबसे श्रेष्ठ उम्मत बनाया है, तथा इस उम्मत के पैगंबर को समस्त ईश्दूतों और संदेष्टाओं में श्रेष्ठतम और उन सबकी अंतिम कड़ी बनाया है। और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मोहब्बत को....
धन की ज़कात उसी के जिन्स से निकाली जायेगी - (हिन्दी)
क्या ज़कात को रूपये (नक़द), या गेहूँ, या चावल, या किसी भी अनाज की शक्ल में दिया जा सकता है ? क्या उसे नक़द मुद्रा के रूप में देना जायज़ है ? क्या उस धन में ज़कात अनिवार्य है जिसके द्वारा वह व्यापार करने की इच्छा रखता है, और अगर....
नास्तिक को ज़कात देना - (हिन्दी)
क्या ज़कात के माल से या क़ुर्बानी के दिन क़ुर्बानी के गोश्त से अनेकेश्वरवादी नास्तिक पड़ोसी को, जिसके और आपके बीच कोर्इ रिश्तेदारी नहीं है, देना जायज़ है ?
ज़कात निकालने का समय - (हिन्दी)
मुझे रजब के महीने में एक राशि प्राप्त हुर्इ, और मैं रमज़ान के महीने में उसकी ज़कात निकालना चाहता हूँ, तो क्या यह वैध है ? और इसका कारण यह है कि रमज़ान के महीने में ज़रूरतमंदों का पता चलता है।
नक़द धन की ज़कात की गणना का तरीक़ा - (हिन्दी)
कुछ विद्वानों का कहना है कि जिन नक़दी धनों में ज़कात अनिवार्य है उन का निसाब (यानी ज़कात के अनिवार्य होने की न्यूनतम मात्रा) यह है कि वह 56 (छप्पन) सऊदी रियाल के बराबर हो जाए। किंतु कुछ दूसरे लोगों का कहना है कि यह निसाब एक ऐसे समय में....

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